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Monday, September 12, 2011

[jigyasa aur samadhan] मुझे क्रोध बहुत आता हे







प्रश्न :-मुझे क्रोध बहुत आता हे !क्रोध की स्थिति में कुछ भी कर डालता हूँ जो कई बार बहुत हानिकारक भी होता है ! में क्या करूँ कैसे अपने क्रोध को रोकूँ? 
गुरूदेव :-आप पहले तो एकांत में बैठकर यह विचार करें कि आपको क्रोध आता ही क्यों है !सामान्यत: व्यक्ति जो सोचता है वह नहीं हो पाए ,स्वार्थ सिद्धि  में बाधा आए , अथवा परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाए तो क्रोध आता है ! हानि  से बचने के लिए आवश्यक यह है कि जब भी क्रोध आए , लम्बी गहरी श्वास लें और क्रोध के विषय से स्वंय को दूर ले जाए और प्रतिकार को २४ घंटे के लिए टाल दें !मन में अपने गुरु का ध्यान और मन्त्र जाप शुरू कर दें !बाद में एकांत में विचार करें इस स्थिति के लिए में कहाँ तक दोषी हूँ !




आज का जीवन सूत्र-१३-९-२०११

आज का जीवन सूत्र-१३-९-२०११
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जंगल में रहो या बस्ती में जहां भी रहो रहो मस्ती में !

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

आज का विचार - 12/9/11



आपका वास्तविक रूप है शान्ति। हर पल शान्ति में, प्रसन्न्ता में बिताने की कोशिश करें ।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Peace is your original nature. Try to spend every moment in peace and happiness.


 
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma

 


Sunday, September 11, 2011

Fwd: [GURUVANNI] jigyasa aur samadhan: जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही ...



---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>
Date: 2011/9/11
Subject: [GURUVANNI] jigyasa aur samadhan: जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही ...
To: mggarga@gmail.com


jigyasa aur samadhan: जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही ...: To SEE MORE POSTINGS (AAJ KA VICHAR) VISIT BLOGS जिज्ञासु :- पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही मिलता है तो जीवन में कर्म क़ा क्या ...

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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 9/11/2011 07:10:00 PM

आज का जीवन सूत्र-१२-९-२०११

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दुनिया नहीं बदला करती तुम को अपने आपको बदलना होता है !

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही मिलता है.....


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जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव :  अगर भाग्य के अनुसार ही मिलता है तो जीवन में कर्म क़ा क्या महत्त्व है ?
पूज्य गुरूदेव : माना कि भाग्य बहुत प्रबल है ,लेकिन यह जो कर्म के चुनाव और कर्म करने की स्वतंत्रता भगवान ने दी है ,यह इतनी शक्तिशाली है कि अगर हम इसकी शक्ति के बल पर चलें तो दुर्भाग्य चाहे कितना भी प्रबल हो , हम उसे पराजित कर सकते हैं ! यह बात निशचित है ! अपना प्रयास जारी रखो ! नितन्तर चोट करते रहो ,बात जरूर बनेगी ! निराश हो कर बीच में छोड़कर बैठना नहीं , बात जरूर बनेगी ! थक कर बैठ गए तो बात बिगड़ जाएगी ! लगातार चलते रहे तो कभी न कभी परमात्मा अवश्य सुनेगा !"राम राम रटते रहो जब तक घट में प्राण "  दीनदयाल बहरे नहीं हैं ! अपने को उनकी कृपा का पात्र बनाओ ! अपनी पात्रता सिद्ध करो ! आपकी पात्रता सिद्ध होते ही दीनदयाल को भनक मिलनी शुरू हो जाएगी ! फिर आपके द्वारा किये गए कर्म का प्रभाव दिखना शुरू हो जाएगा !

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज