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Thursday, September 26, 2013

Fwd: [GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL] आज का गुरु सन्देश-25 -09-13-शनि का प्रकोप बचने का उपाए




Subject: ] आज का गुरु सन्देश-25 -09-13-शनि का प्रकोप बचने का उपाए



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

http://ammritvanni.blogspot.in/2013/09/25-09-13.html

AMRIT VANI : आज का गुरु सन्देश-25 -09-13-शनि का प्रकोप बचने का उपाए


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Posted By Madan Gopal Garga LM VJM to GURU VATIKA SE CHUNE PHOOL at 9/26/2013 09:22:00 AM

Wednesday, September 25, 2013

Fwd: दुनियाँ में चाहे कोई


दुनियाँ में चाहे कोई कितना भी समर्थ हें या असमर्थ हें, निर्बल या बलशाली हें, हर एक को 

परिश्रम करना पड़ेगा,अगर वह सफलता प्राप्त करना चाहता हें

    

 
 परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
 
 


 







Fwd: दुनियाँ में चाहे कोई



दुनियाँ में चाहे कोई कितना भी समर्थ हें या असमर्थ हें, निर्बल या बलशाली हें, हर एक को 

परिश्रम करना पड़ेगा,अगर वह सफलता प्राप्त करना चाहता हें

    
 
 परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
 
 


 






Fwd: [AMRIT VANI] जिसके पास धैर्य है वह




जिसके पास धैर्य है वह जो कुछ इच्छा करता है उसे प्राप्त कर सकता है। धैर्य कडवा होता है पर उसका फ़ल मीठा होता है।



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज








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Friday, August 30, 2013

Fwd: [Vishwa Jagriti Mission ( World Awakening Mission)] यो सौदा फिर नाहीं संतों, यो सौदा फिर नाहीं ||टेक||





Lokesh Kumar
यो सौदा फिर नाहीं संतों, यो सौदा फिर नाहीं ||टेक||
लोहे के सा ताव जात है, काया देह सिराहीं |
यो दम टूटै पिण्डा फूटै, हो लेखा दरगह माहीं |
तीन लोक और भवन चतुर्दश, यो जग सौदे आई |
दूने तीने किये चौगने, किनहूं मूल गंवाई |
उस दरगह में मार पड़ेगी, जम पकरैंगें बाहीं |
वा दिन की मोहि डरनी लागै, लज्या रहै के नाहीं |
नर नारायण देह पाय कर, फिर चौरासी जाहीं |
जा सतगुरु की मैं बलिहारी, जामन मरण मिटाहीं |
कुल परिवार सकल कबीला, मसलति एक ठहराई |
बांधि पिंजरी आगै धरिया, मडहट में ले जाहीं |
अग्नि लगा दिया जदि लंबा, फूकि दिया उस ठाहीं |
वेद बांधि कर पंडित आये, पीछै गरुड़ पढ़ाहीं |
नर सेती फिर पशुवा कीजै, गधा बैल बनाई |
छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कुरडी चरने जाई |
प्रेतशिला पर जाय बिराजे, पितरों पिंड भराहीं |
बहुरि शराध खान कूं आये, काग भये कलि माहीं |
जो सतगुरु की संगत करते, सकल कर्म कट जाहीं |
अमरपुरी में आसन होते, ना जहाँ धूप न छाहीं |
सुरति निरति मन् पवन पियाना, शब्दें शब्द समाई |
गरीबदास गलतान महल में, मिले कबीर गोसांई

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