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Tuesday, December 1, 2009

दोहे -१०


  • 87*काम करते चलो नाम जपते चलो !
    हर समय शिव का ध्यान धरते चलो !
    नाम धन का खज़ाना बढाते चलो !
    प्रेम से तुम प्रभू को रिझाते चलो !
    अपने मन को सुमार्ग पर चलाते चलो !

  • 88*किसी दिन देखना ,तुम्हें ऐसी नीद आएगी !
    तुम सोए जग नहीं पाओगे ,दुनिया तुम्हें जगाएगी!!

  • 89*सुमिरन सुरति लगाय के ,मुख से कुछ न बोल !

    बाहर के पट देय के , अन्दर के पट खोल !!

  • 90*सही रूप उभरेगा उस दिन मानव के उथान का !
    जिस दिन होगा मिलन विश्व में धर्म और विज्ञान का !
    स्वार्थ नहीं परमार्थ बनेगा ,चरम लक्ष्य जग में जन जन का !
    ईर्श्या-द्वेष कलह हिंसा से कलुषित क्षेत्र न होगा मन का !
    प्रिमार्जन पुरुषार्थ करेगा ,बिगडे भाग्य विधान का !
    जिस दिन होगा मिलन विश्व में धर्म और विज्ञान का !

  • 91*बदऊं गुरु पदुम परागा !
    सुरुचि सुबास सरस अनुरागा !
    अमिअ मूरिम चूरन चारू !
    समन सकल भव रुज प्रिवारू !

  • 92*भव्सागर सब सूख गयो हे !
    फिकर नहीं मोहे तरनन की!
    मोह्र लागी लगन गुरु चरनन की !

  • 93*गुरु शब्ध का अर्थ ,
    अति गुह्य बतलाते हें !
    गुरु की यदि कृपा हो तो ,
    अधम व्यक्ति तर जाते हें !!
    94*जीवन क्या हे ?निर्झर हे ,मस्ती ही उसका पानी हे !

    सुख दुख के दो किनारों से ,चल रहा मन मानी हे !

  • 95*साधु कुछ नहीं मांगते उदर समाता लेय !
    आगे पीछे राम हैं जब मांगे तब देय !!

  • 96*खुशी के गीत सदा गाओ ,
    सत्कर्म सुमन से धरती महकाओ !
    ईश्वर ने कितना कुछ तुम्हें बख्शा ,
    मानव ! तुम सन्तुष्ट होकर दिखलाओ !!

  • 97*बकरी जो में में करे ,
    गले छुरी चलवाए ,
    दे कर जो में न कहे ,
    सब के मन को भाए !

  • 98*एक भरोसा एक पक्ष ,
    एक आस एक विश्वास ,
    एक राम एक घन्श्याम हे ,
    चातक तुलसीदास !

  • 99*रहिमन धागा प्रेम का
    मत तोडो चटकाय!
    टूटे से फिर न जुडे ,
    जुडे गांठ पड जाए !

Sunday, November 29, 2009

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Saturday, November 21, 2009

दोहे-१०



  • 82*चलो प्रभू की नगरिया दुनिया से नाता तोड्के !
    पेट पकड्कर मैया रोए , बांह पकडकर भैया!
    पैर पकड कर छोडत नाहीं , रो-रोकर कह रही तिरया !
    कहाँ जाते हो अकेले सइया ,धोली चुनरिया ओढके !
    चलो प्रभू की नगरिया दुनिया से नाता तोड्के !

  • 83*डूबतों को बचा लेने वाले , मेरी नैया हे तेरे हवाले !
    नैया पडी मंझदार ,गुरु बिन कैसे लागे पार !

  • 84*इक तेरी दया का दान मिले ,ऐक तेरा सहारा मिल जाए !
    भवसागर में बहती मेरी नैया को , किनारा मिल जाए 1

  • 85*मेरा नाथ तू हे ,मेरा नाथ तू हे !
    नहीं में अकेला , मेरे साथ तू हे !
    मेरा राम तू हे ,मेरा श्याम तू हे !
    मेरी जिन्दगी की ,सुबह-शाम तू हे !

  • 86*हे नाथ अब तो ऐसी कृपा हो ,
    जीवन निरर्थक जाने न पाए !

दोहे-९

      


  74*न खुदा ही मिला , न विसाले सनम !
            न इधर के रहे , न उधर के रहे !!


  • 75*पास रहता हूँ तेरे सदा !
    तू नहीं देख पाए तो में क्या करूँ !!

  • 76*भरोसा कर तू ईश्वर पर , तुझे धोका नहीं होगा !
    यह जीवन बीत जाएगा , तुझे रोना नहीं होगा !!

  • 77*जिन्दगी का सफर करने वाले ,
    अपने मन का दिया तो जला !

  • 78*प्रेम बिना जो भक्ति हे , सो नित दम्भ विचार !
    उदर भरत् के कारन , जन्म गंवाए सार !!

  • 79*हे -री मैने लिया गोविंन्द मोल ,
    कोई कहे महगा, कोई कहे सस्ता ,
    में ने लिया तराजू तोल !!

  • 80*मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई !!
  • 81*ऐसी लागी लगन ,मीरा हो गई मगन ,
    वह तो गली गली हरि गुण गाने लगी !!

Friday, November 20, 2009

दोहे-८




71*घृत नया धान पुराना घर कुलवन्ती नार !
आंगन में बालक खेल्रे स्वर्ग निशानी जान !!


72*रूखा भोजन कर्ज सिर पर कुलक्षणी नार !
आवत का आदर नहीं नरक निशानी जान !!

73*पहला सुख निरोगी काया ,दूजा सुख घर में हो माया !
तीजा सुख पुत्र आग्याकारी,चौथा सुख पतिव्रता नारी !
पांचवां सुख राज्य विपासा ,छठा सुख सुस्थान निवास !
सातवाँ सुख विद्या फलदाता ये सातों सुख रचे विधाता !

Thursday, November 19, 2009

दोहे -७

55*हजारों महफिले होंगी,हजारों कारवा होंगे !
जमाना हम को ढूढेगा न जाने हम कहां होंगे !!


56*दुनिया में खूब कमाया क्या हीरे क्या मोती !
पर क्या करें यारो कफन में जेब नहीं होती !!

57*दुनिया में हूं दुनिया का तलबगार नहीं हूं !
बाजार से गुजारा हूँ पर खरीदार नहीं हूँ !!

58*कबीर खडा बाजार में सब की माँगें खैर !
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर !

59*झुके तेरे आगे वह सर मांगता हूं ,
तुझे देखने की नजर मांगता हूं !
न घर मांगता हूं न जर मांगता हूं ,
न हो जाऊं बेसुध जलवे में तेरे ,
ईलाही में ऐसी नजर मांगता हूं !

60*मिटा दे अपनी हस्ती को गर मर्तबा चाहे!
कि दाना खाक में मिल गुलो-गुलजार होता हे !!

61*रहिमन विपदा हू भली,जो थोडे दिन होय !
हित अन्हित या जगत में ,जान परे सब कोय !!

62*जिन दिन देखे वे सुमन ,गई सो बीती बहार !
अब अलि रहि गुलाब में लिपट कटीली डार !!
लगता नहीं दिल मेरा ,उजडे ब्यार में!

63*उमरे दराज मांग कर लाए चार दिन,
दो आरजू में कट गये दो इंतजार में !
इतना हे बदनसीब जफर दफन के लिए,
दो गज जमीन भी न मिलि कुंएयार में !